अल्मोड़ा। भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत बागेश्वर जिले के ग्राम लोहबा में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम का समन्वय वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारती और डॉ. मनोज कुमार ने किया। कार्यक्रम में 16 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 11 पुरुष और 5 महिला कृषक शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने हरी खाद, जैविक एवं जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण प्रयोग पर जोर दिया। किसानों को बताया गया कि संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर मृदा की उर्वरता बनाए रखने के साथ फसल उत्पादकता में भी वृद्धि की जा सकती है।
कार्यक्रम में रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा दैनिक भोजन में तेल का कम उपयोग करने की सलाह दी।
इस दौरान किसान क्रेडिट कार्ड सहित कृषि क्षेत्र से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं और अनुदान योजनाओं की जानकारी भी दी गई। साथ ही किसानों को कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में किसानों ने कृषि संबंधी समस्याओं, अनुभवों और जिज्ञासाओं को वैज्ञानिकों के साथ साझा किया। संवादात्मक शैली में आयोजित इस कार्यक्रम को किसानों ने उपयोगी बताया। इसके माध्यम से मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
