अल्मोड़ा। विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में संस्थान के वैज्ञानिकों की पांच टीमों ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत अल्मोड़ा और नैनीताल जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य, संतुलित पोषक प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा सतत कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था। अभियान में कुल 85 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 55 महिला और 30 पुरुष किसान शामिल रहे। नैनीताल जिले के धारी क्षेत्र के लदफोड़ा मल्ला, लदफोड़ा तल्ला, सरना, अक्सोड़ा और हरिनगर सारना गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित पोषक प्रबंधन, समेकित पोषक प्रबंधन, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद तथा प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया। वहीं अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड स्थित ढाबरा सौराल गांव में आयोजित कार्यक्रम में 35 किसानों ने भाग लिया। यहां मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन और एकीकृत खेती प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को फसल बीमा, कृषि निवेश सहायता, कृषि यंत्रों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण, कार्बनिक पदार्थों के उपयोग तथा पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इन उपायों से उत्पादन लागत कम करने के साथ दीर्घकालीन कृषि उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। कार्यक्रमों का संचालन डॉ. जय प्रकाश आदित्य, डॉ. दिनेश चंद्र जोशी, डॉ. देवेंद्र शर्मा, डॉ. प्रकाश घासल और डॉ. प्रियंका खाती सहित संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया। कार्यक्रमों में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कृषि संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिकों से संवाद कर समाधान प्राप्त किए।
