विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान ने श्रमिकों की हड़ताल को बताया निराधार

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग में ठेकेदार के कुछ श्रमिक एक अप्रैल से हड़ताल पर हैं। संस्थान ने इसे बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह अनुचित मांगों को लेकर की जा रही है। संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प) के अंतर्गत कार्यरत है और वर्ष 2001 से ठेका श्रमिकों को नियुक्त करता आ रहा है। श्रमिकों की नियुक्ति जेम पोर्टल के माध्यम से भारत सरकार के नियमों के अनुसार होती है। संस्थान का कहना है कि सभी ठेका श्रमिक हड़ताल में शामिल नहीं हैं, लेकिन कुछ अराजक तत्व दूसरों को धमका रहे हैं, जिससे शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। कुछ बाहरी लोग भी प्रदर्शन में शामिल होकर संस्थान की छवि धूमिल कर रहे हैं, जो गलत है। संस्थान ने स्पष्ट किया कि सभी श्रमिकों को पूरा भुगतान किया जाता है और ईपीएफ-ईएसआई की राशि नियत समय पर जमा होती है। ठेकेदार को वेतन समय पर देने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। संस्थान के अनुसार, कृषि कार्यों की मांग बदलती रहती है, इसी वजह से श्रमिकों को समझाया गया था। हड़ताल जारी रही तो संस्थान उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई करने में असमर्थ होगा। ठेकेदार को 25 मार्च तक कोऑर्डिनेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था, जिसका पालन न होने के कारण अब अनुबंध निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।