अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में हिमोत्थान सोसाइटी के सहयोग से 9 से 11 फरवरी 2026 तक सब्जी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कोटाबाग और धारी विकासखंड के 30 कृषकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 15 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ कीट एवं रोग प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से सब्जी उत्पादन बढ़ाने की जानकारी देना था। प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों में संस्थान के वैज्ञानिकों ने खुले तथा संरक्षित वातावरण में उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीकों, कीट प्रबंधन के महत्व और संस्थान के शोध कार्यों की जानकारी दी। किसानों को डिजिटल माध्यमों से कृषि परामर्श प्राप्त करने के तरीकों से भी परिचित कराया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत ने किसानों से संवाद करते हुए उत्पादन और विपणन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की और खेती में विविधता अपनाकर आय बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। व्यावहारिक सत्रों में प्रतिभागियों को प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान, क्षति के लक्षण और नियंत्रण उपायों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही कीट सर्वेक्षण, लाभकारी जीवों की पहचान, फेरोमोन और स्टिकी ट्रैप लगाने की विधि, स्थानीय वनस्पतियों से कीटनाशी अर्क तैयार करने तथा जैव-नियंत्रण एजेंट्स के उपयोग का प्रदर्शन कराया गया। प्रशिक्षण में सूक्ष्मजीव आधारित जैव नियंत्रण तकनीक, फसल-विशिष्ट समेकित कीट प्रबंधन मॉडल और कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के बारे में भी बताया गया। समापन सत्र में प्रतिभागी किसानों से अनुभव साझा कराए गए और उन्हें प्रमाणपत्र वितरित किए गए। किसानों ने कार्यक्रम को व्यवहारिक और उपयोगी बताते हुए ऐसे प्रशिक्षण नियमित आयोजित करने की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. प्रताप दिवेकर, डॉ. देवेंद्र शर्मा और डॉ. प्रियंका खाती ने किया।