देहरादून(आरएनएस)। चमोली जिला पंचायत में प्रशासक पद पर नियुक्ति को लेकर मचे घमासान पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। यहां प्रशासक पद पर नियुक्ति को लेकर निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच खींचतान जारी है। इस मुद्दे पर सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि धामी राज में सुचिता और पारदर्शिता का कितना ख्याल रखा जा रहा है, इसकी बानगी चमोली में देखने को मिल रही है। जिस रजनी भंडारी पर नंदा राजजात यात्रा में वित्तीय अनियमित्ता के आरोप लगाते हुए भाजपा की सरकारों ने लगातार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और रजनी भंडारी के कार्यकाल की जांच बैठाई। आज वही सरकार रजनी भंडारी के पति राजेंद्र भंडारी के भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी सबसे बड़ी पैरोकार और संरक्षक बन गई है। गरिमा ने बताया कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर जब तमाम अध्यक्षों को प्रशासक के तौर पर नियुक्त किया गया तो भाजपा के ही नेता और जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने पंचायती राज मंत्री और सचिव को पत्र लिखकर कहा कि जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, वह प्रशासक के पद पर कैसे बैठ सकता है? बाद में जिलाधिकारी को प्रशासक बना दिया गया। दसौनी ने कहा कि पंचायत एक्ट के अनुसार अध्यक्ष के ना होने पर उपाध्यक्ष जिला पंचायत को चार्ज दिया जाता है, लेकिन चमोली में ऐसा नहीं हुआ।