देहरादून(आरएनएस)। उत्तरांचल विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर से शनिवार को सीआईडी मुख्यालय सीमाद्वार में एआई आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियेां को अपराधों की जांच और खुलासे में एआई के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आधुनिक अपराध अनुसंधान में एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से कार्यकुशलता, सटीकता एवं गति को बढ़ाना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ विवि प्रो. सुमित चौधरी और अपर पुलिस अधीक्षक मनोज ठाकुर ने किया। प्रो. चौधरी ने कानून प्रवर्तन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका के बारे में बताते हुए कहा कि डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, फेसियल रिकग्निशन एवं प्रेडिक्टिव पुलिसिंग जैसी तकनीकें अपराध अनुसंधान को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।उन्होंने तकनीकी नवाचारों को अपनाने एवं डिजिटल कौशल विकसित करने पर बल दिया। कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव विवेक का स्थान नहीं लेती, बल्कि यह जांच अधिकारियों के लिए एक सशक्त सहायक उपकरण है, जो निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक एवं समयबद्ध बनाता है। अपर पुलिस अधीक्षक मनोज ठाकुर ने उत्तरांचल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उत्तरांचल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल की सराहना करते हुए सीआईडी अधिकारियों को निरंतर सीखने और नवाचार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान इंटरएक्टिव डेमोंस्ट्रेशन एवं हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी दिया गया। जिससे अधिकारियों को अपराध अनुसंधान से संबंधित एआई टूल्स का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
