नई दिल्ली (आरएनएस)। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक एआई जनित वीडियो ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने देर रात एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान केतली और गिलास लेकर चाय बेचते हुए दिखाया गया है। व्यंग्य शैली में तैयार किए गए इस वीडियो पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे प्रधानमंत्री पद तथा राष्ट्रीय संस्था के सम्मान का अपमान बताया है।
रागिनी नायक द्वारा पोस्ट किए गए इस वीडियो के साथ लिखा गया कैप्शन— “अब ई कौन आया बे” —ने विवाद को और गहरा दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल राजनीतिक कटाक्ष नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की सामाजिक पृष्ठभूमि और ओबीसी समुदाय का अपमान है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने प्रतिक्रिया में कहा कि कांग्रेस अब भी नरेंद्र मोदी की गरीब परिवार से जुड़ी पृष्ठभूमि को स्वीकार नहीं कर पा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले भी प्रधानमंत्री के परिवार, विशेषकर उनकी दिवंगत मां के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर चुकी है, जिसे देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सी. आर. केसवन ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि यह वीडियो 140 करोड़ मेहनतकश भारतीयों का अपमान है और ओबीसी समुदाय पर सीधा प्रहार है। केसवन के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और जनता के समर्थन से असहज है।
गौरतलब है कि स्वयं नरेंद्र मोदी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह बता चुके हैं कि उनके पिता गुजरात के वडनगर स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे और बचपन में उन्होंने भी वहां मदद की थी। 2014 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने उनके इसी संदर्भ का मजाक उड़ाते हुए उन्हें चायवाला कहकर निशाना बनाया था। हालांकि, नरेंद्र मोदी तीन बार देश के प्रधानमंत्री बनकर इस टिप्पणी का प्रत्यक्ष जवाब दे चुके हैं।
यह विवाद अपने आप में नया नहीं है। इससे पहले भी कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को लेकर एआई आधारित व्यंग्यात्मक वीडियो साझा किए जा चुके हैं। बिहार चुनाव के दौरान पोस्ट किए गए एक ऐसे ही वीडियो पर भी भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रधानमंत्री की दिवंगत मां और गरीब वर्ग का अपमान बताया था।
एआई तकनीक के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर उठी यह बहस लगातार गहराती जा रही है, जबकि दोनों दल इसे जनमत को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।
