अल्मोड़ा। बिनसर वनाग्नि दुर्घटना में घायल हुए श्रमिकों और मृतकों के परिजनों को स्थायी नियुक्ति और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए जाने की मांग को लेकर बिनसर क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी आलोक पांडे से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। साथ ही एक ज्ञापन प्रभागीय वन अधिकारी दीपक सिंह के माध्यम से प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड को भी भेजा गया। लोक प्रबंध विकास संस्था के संचालक ईश्वर जोशी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि 13 जून 2024 को बिनसर में हुई भीषण वनाग्नि दुर्घटना में घायल हुए कैलाश भट्ट पिछले तीन दशक से वन विभाग में कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक स्थायी नियुक्ति नहीं मिल पाई है। 54 वर्ष की उम्र में वे आग की चपेट में आने के कारण अब रोजमर्रा के कार्य भी करने में असमर्थ हो गए हैं। उनका बेटा भी बेरोजगार है। इसी तरह घायल भगवत सिंह भोज पिछले दस वर्षों से वन विभाग में दैनिक श्रमिक के रूप में वाहन चालक का कार्य कर रहे थे। वनाग्नि में गंभीर रूप से झुलसने के बाद अब वे वाहन चालक का कार्य नहीं कर पा रहे हैं। तीन छोटे बच्चों सहित पूरे परिवार का भरण-पोषण उनके लिए बड़ी समस्या बन गया है। ज्ञापन में कहा गया कि दोनों घायलों को निशुल्क इलाज के अलावा अन्य कोई सहायता नहीं मिली है। भगवत सिंह भोज को इलाज में हुए खर्च की भरपाई भी नहीं की गई। अब तक दोनों घायलों को वनकर्मियों के एक दिन के वेतन से केवल 47,500 रुपये की राशि ही मिल पाई है। उन्हें हर तीन माह में इलाज के लिए दिल्ली जाना पड़ता है, जिसका यात्रा व्यय भी वे स्वयं उठा रहे हैं। सामाजिक संगठनों ने इस खर्च का वहन सरकार से करने की मांग की। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की मुख्यमंत्री की घोषणा अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। ज्ञापन देने वालों में लोक प्रबंध विकास संस्था के संचालक ईश्वर जोशी, वन पंचायत संगठन के अध्यक्ष सुंदर सिंह पिलख्वाल, पारिस्थितिकी विकास समिति के अध्यक्ष सुशील कांडपाल, संसाधन पंचायत के पूरन सिंह और हिमांशु शामिल थे।